हमारे बारे में
स्वदेशी गौ सेवा समिति, नन्दगांव नेहरा (चैलचौक, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश) की एक सेवाभावी संस्था है, जो स्वदेशी गौ वंश के संरक्षण, सम्बर्द्धन एवं गोपालन के लिए समर्पित है।
लक्ष्य
स्वदेशी गौ वंश के संरक्षण, सम्बर्द्धन एवं गोपालन को रचनात्मक रूप में कृषकों एवं गोपालकों तक पहुंचाना।
उद्देश्य
उक्त लक्ष्य की प्राप्ति से ही सात्विक आहार (दुग्धाहार) एवं पंचगव्य द्वारा पूर्ण स्वस्थ, रोग रहित, व्यसन मुक्त, स्वावलम्बी, स्वार्थ रहित, आस्थावान, मानवीय सद्गुणों वाले पर्यावरण रक्षक समाज का निर्माण।
दूषित-विषाक्त वायु, जल एवं पृथ्वी को पुनः केवल मानवीय जीवन ही नहीं, सम्पूर्ण प्राणी मात्र के अनुरूप बनाना; तथा अतिवृष्टि-अनावृष्टि, अव्यवस्थित जलवायु परिवर्तन एवं पालतू पशुओं के कष्टपूर्ण, लावारिस, बेसहारा जीवन संघर्ष से मुक्त वातावरण का निर्माण।
हमारी परम्परा के अनुसार यह स्वदेशी गौ वंश के गव्य (पंचगव्य) — गोमय, गोमूत्र, श्वास-निःश्वास, उपस्थिति एवं वृद्धि — से ही सम्भव है। यह सत्य इस देश के ऋषियों ने प्रतिपादित किया है और वेदों में भी इसका वर्णन है।

हमारी यात्रा
- 2014–2016
लगभग दो वर्षों तक निरन्तर गाँव-गाँव घूमकर, विभिन्न कथा-प्रवचनों में जाकर, पंचायतों की आम सभाओं एवं विद्यालयों में पहुंचकर गौ संरक्षण एवं पशु समस्याओं के प्रति जन-जागरूकता।
- 2 मार्च 2017
परम पूज्य गुरुदेव महंत श्री भगवत गिरि जी महाराज की प्रेरणा से, श्रद्धेय आचार्य श्री देवव्रत जी (तत्कालीन राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश) के कर कमलों से श्री सुरभि गोधाम का विधिवत शुभारम्भ।
- प्रदेश सरकार
तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय जय राम ठाकुर जी ने सत्ता संभालते ही गंभीरता एवं वरीयता से प्रदेश के पशुओं एवं गौवंश की समस्या का संज्ञान लिया। समिति ने भी अपना नैतिक दायित्व समझकर बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान हेतु अपना योगदान दिया।
- वर्तमान
सभी सुविधाओं से युक्त आधुनिक गौशाला का निर्माण गौ कृपा से प्रायः पूर्ण कर लिया गया है।
आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन
परम पूज्य गुरुदेव महंत श्री भगवत गिरि जी महाराज
जिनकी प्रेरणा से श्री सुरभि गोधाम का शुभारम्भ हुआ।
सिद्धसंत श्री शान्तिदास बापू
समिति को आपका अनुग्रह प्राप्त है।
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा (राजस्थान)
प्रयोजन सिद्धि एवं मार्गदर्शन हेतु समिति इस महातीर्थ से सम्बद्ध होने का प्रयास कर रही है।
समाज का सहयोग
यह देव कार्य — गौ सेवा का कार्य — समाज के हित के लिए है। बिना सामाजिक सहयोग के लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो सकती, अतः संस्था समाज से वैचारिक, व्यावहारिक, आर्थिक एवं नैतिक — सभी प्रकार के सहयोग की अपेक्षा रखती है। इसे गति देने के लिए संस्था समय-समय पर पत्रक, पुस्तिका, बैठकों, सम्मेलनों एवं धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा लेती है।
हमारे रंगों का अर्थ
केसरिया
त्याग एवं सेवा — गौ सेवा की भावना।
क्रीम
पवित्रता एवं सात्विकता — दूध और घी का रंग।
हरा
प्रकृति, कृषि एवं हिमाचल की हरी-भरी पहाड़ियाँ।